अम्बिकापुर

आरएसएस अंबिकापुर नगर द्वारा गणतंत्र दिवस पर युवा संगम का आयोजन

अंबिकापुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अंबिकापुर नगर द्वारा गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर संघ के शताब्दी वर्ष में निर्धारित कार्यक्रम के अंतर्गत माखन विहार में युवा संगम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवक-युवतियों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही। कार्यक्रम में पूर्व से पंजीकृत युवाओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।


कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्प समर्पण के साथ हुआ।
प्रथम सत्र में कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्रीमान दीपक विसपुते जी, अखिल भारतीय सह बौद्धिक शिक्षण प्रमुख, ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि देश की दुर्दशा से व्यथित स्वामी विवेकानंद ने भारत के उत्थान हेतु ऐसे 100 नवयुवकों का आह्वान किया था जो राष्ट्र के लिए मरने-जीने को तत्पर हों। इस आह्वान पर सर्वप्रथम एक विदेशी महिला मारगरेट एलिज़ाबेथ नोबल आगे आईं, जिन्हें स्वामी विवेकानंद ने भागिनी निवेदिता नाम दिया। शेष नवयुवकों का आना शेष रह गया।
उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का विचार था कि ऐसे संस्कार केंद्र बनें जहाँ देशभक्त नागरिकों का निर्माण हो, किंतु अल्पायु के कारण वे इस विचार को मूर्त रूप नहीं दे सके। संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव हेडगेवार ने उन्हीं विचारों को शाखा रूपी तंत्र के माध्यम से साकार कर व्यक्ति निर्माण का संकल्प सिद्ध किया। तत्कालीन समाज आत्मविस्मृत, आत्मकेंद्रित एवं असंगठित था, जिसके निवारण हेतु शाखा समाज जागरण की औषधि और एक वैचारिक आंदोलन बनी।
मुख्य वक्ता ने “युवा” शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि युवा होना केवल आयु का बोध नहीं है, बल्कि यह कर्तव्यबोध, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव है। जो व्यक्ति अपने दायित्वों के प्रति सदा स्थिर रहता है, वही सच्चा युवा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो सेवा को संस्कार समझें, अनुशासन को शक्ति मानें और समाज को अपना परिवार मानें। युवा भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान है और वर्तमान में कर्तव्य निभाने वाला युवा ही राष्ट्र का निर्माण करता है।
जिज्ञासा समाधान सत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ की शाखा में कोई भी आ सकता है, जिसके हृदय में भारत माता के प्रति श्रद्धा हो, जो इस धरती को अपनी मातृभूमि मानता हो तथा देश के इतिहास एवं महापुरुषों के प्रति आदर रखता हो, चाहे वह किसी भी पूजा पद्धति का अनुसरण करता हो।


कार्यक्रम के दौरान युवाओं को संघ की शाखा के कार्यक्रम से परिचित कराया गया, जिसमें खेल, बौद्धिक चर्चा एवं सामूहिक गतिविधियों के माध्यम से शारीरिक एवं बौद्धिक विकास के अनुकूल परिस्थिति का निर्माण होने की जानकारी दी गई।


कार्यक्रम का संचालन मिथलेश गुर्जर द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन माधवेंद्र सिंह द्वारा किया गया।
इस अवसर पर जिला संघचालक भगवान दास बंसल, सह नगर संघचालक अभय पालोरकार, प्रांत सेवा प्रमुख तुलसीदास, सह प्रांत प्रचारक नारायण नामदेव, सह प्रांत महाविद्यालयीन कार्य प्रमुख विक्रांत मिश्रा, प्रांत मुख्य मार्ग प्रमुख गौरांगो सिंह, कार्यक्रम संयोजक डॉ. परमानंद अग्रवाल, विभाग संपर्क प्रमुख नरेंद्र सिन्हा, विभाग प्रचारक हेमंत नाग, सह जिला कार्यवाह अनुज दुबे, जिला महाविद्यालयीन कार्य प्रमुख हिमांशु गर्ग, सह नगर कार्यवाह डॉ. गोकरण सिंह, यशराज सिंह, देवेंद्र सिंह, उत्कर्ष मिश्रा, राघव पाठक, शिवानंद सहित नगर, जिला एवं विभाग के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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