टीएस सिंह देव ने पंचायत मंत्री के पद से दिया इस्तीफा

अंबिकापुर । प्रदेश के स्वास्थ्य एवं पंचायत मंत्री टी एस सिंह देव ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है। विदित हो कि छत्तीसगढ़ के कद्दावर कांग्रेस नेता टी एस सिंह देव पिछले कुछ दिनों से नाराज चल रहे थे उनकी नाराजगी उस वक्त बढ़ गई जब उनसे पूछे बगैर हड़ताल में शामिल होने पर बर्खास्त किए गए 21 मनरेगा एपीओ को बहाल कर दिया गया।
मुख्यमंत्री को लिखे इस्तीफे में टीएस सिंह देव ने कहा है कि पिछले 3 वर्षों से मैं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के भार साधक मंत्री के रूप में कार्य कर रहा हूं इस दौरान कुछ ऐसी परिस्थितियां निर्मित हुई है जिससे मैं आपको अवगत कराना चाहता हूं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश के आवास विहीन लोगों को आवास बना कर दिया जाना था जिसके लिए मैंने कई बार आपसे चर्चा कर राशि आवंटन का अनुरोध किया था किंतु इस योजना में राशि उपलब्ध नहीं की जा सकी फल स्वरुप प्रदेश के लगभग 8 लाख लोगों के लिए आवास नहीं बनाए जा सके हैं इसके अतिरिक्त 8 लाख घर बनाने से करीब 10 हजार करोड़ प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सहायक होते हमारे जन घोषणापत्र में छत्तीसगढ़ के 36 लक्ष्य अंतर्गत ग्रामीण आवास का अधिकार प्रमुख रूप से उल्लेखित है विचारणीय है कि प्रदेश में वर्तमान सरकार के कार्यकाल में बेघर लोगों के लिए एक भी आवाज नहीं बनाया जा सका और योजना की प्रगति निरंक रही मुझे दुख है कि इस योजना का लाभ प्रदेश के आवास विहीन लोगों को नहीं मिल सका किसी विभाग के अधीन योजनाओं के अंतर्गत कार्यों की स्वीकृति का अनुमोदन उस विभाग के बाहर साधक मंत्री का निर्धारित अधिकार है ।
एक साजिश के तहत रोजगार सहायकों से हड़ताल करवा कर मनरेगा के कार्यों को प्रभावित किया गया जिसमें सहायक परियोजना अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट रूप से निकलकर आई स्वयं आपके द्वारा हड़तालरत कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने के लिए कमेटी गठित की गई इसके बाद भी हड़ताल वापस नहीं ली गई हड़ताल के कारण लगभग 12 से 50 करोड़ की मजदूरी का भुगतान प्रभावित हुआ तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था मैं नहीं पहुंच सका. समन्वय के माध्यम से आप से अनुमोदन लेकर सहायक परियोजना अधिकारियों के स्थान पर रेगुलर सहायक पदाधिकारियों के परी स्थापना भी कर दी गई थी ताकि मनरेगा का कार्य सुचारू रूप से चल सके और रोजगार की तलाश कर रहे नागरिकों को रोजगार से वंचित ना होना पड़े जब रोजगार सहायक अपने काम पर वापस आना चाह रहे थे तब मुझे यह जानकारी प्राप्त हुई कि हटाए गए सहायक परियोजना अधिकारी की पुनः नियुक्ति की कार्यवाही चलने लगी है तब दूरभाष पर मैंने आप से चर्चा कर अपना मत दिया था कि उन्हें उसी पद पर पुनः नियुक्ति ना दिया जाए और अगर रखना ही है तो समकक्ष वेतन के आधार पर विभाग के अन्य पद पर रखा जा सकता है उसी पद पर पुनः रखना सर्वथा अनुचित रहेगा तथा भविष्य में आंदोलन की प्रवृत्ति बलवती होगी तथा अच्छा संदेश भी नहीं जाएगा ऐसी परिस्थिति में ऐसे कर्मचारी जो कि जनहित तथा राज्य हित के विपरीत कार्य कर रहे हैं उनकी नियुक्ति अनुचित है लेकिन इन सबके बावजूद पुनः पदस्थापना मेरे बगैर अनुमोदन के कर दी गई जो कि मुझे स्वीकार्य नहीं है








