“नेकी के सपनों को मंजिल मिल ही जाती है.. मेरे अंबिकापुर की ट्रेन अब दिल्ली जाती है” ..कवि संतोष सरल

अंबिकापुर। अंबिकापुर से दिल्ली जाने वाली ट्रेन अंबिकापुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस 14 जुलाई प्रारंभ हो गई है . ट्रेन की प्रथम रवानगी के अभूतपूर्व क्षणो को देखने जनता का हुजूम अंबिकापुर के रेलवे स्टेशन मे उमड़ पड़ा था. लोग अपने अपने तरीके से इस उपलब्धि की खुशियां मना रहे हैं. अंबिकापुर के कवि संतोष ‘सरल’ ने भी कविता के माध्यम से अपनी खुशियां व्यक्त की है
नेकी के सपनों को मंजिल मिल ही जाती है..
मेरे अंबिकापुर की ट्रेन अब दिल्ली जाती है..
1.
काका लरंग देवेश्वर के तप का यही फल है,
सरगुजा की भोली जनता का प्रेम संबल है.
प्रतीक्षा की घडियां भले ही लगे अंधकारमय,
उषा काल में कमल कली खिल ही जाती है.
मेरे अंबिकापुर की ट्रेन अब दिल्ली जाती है.
2.
मोदी सरकार ने जनता में हां विश्वास भरा है.
रेणुका अश्वनी का प्रयास सौ प्रतिशत खरा है.
बरवाडीह,म्योरपुर का लक्ष्य भी पाऐंगे क्यूंकि,
निशाना सटीक हो तो गोटी पिल ही जाती है.
मेरे अंबिकापुर की ट्रेन अब दिल्ली जाती है.
3.
बहुत मजाक बनता रहा दिल्ली जाने वाली ट्रेन का,
कोई कहता इलाज कराओ भाजपाईयों के ब्रेन का.
सजधज कर देखो चली दिल्ली की दुल्हन आखिर,
सच्चाई को देखकर जुबां सिल ही जाती है.
मेरे अंबिकापुर की ट्रेन अब दिल्ली जाती है.
4.
किसी ने पत्र लिखा तो कोई धरने पर बैठा,
कलमकारों ने सरकारों को चेताया हमेशा.
नारीशक्ति का संकल्प था पूरा कैसे न होता,
मां महामाया हो संग तो कृपा मिल ही जाती है.
मेरे अंबिकापुर की ट्रेन अब दिल्ली जाती है.
नेकी के सपनों को मंजिल मिल ही जाती है..
मेरे अंबिकापुर की ट्रेन अब दिल्ली जाती है..




