बलरामपुर

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय बलरामपुर में महाशिवरा़त्रि पावन त्यौहार धूम-धाम से मनाया गया

त्रिभुवन देवांगन बलरामपुर- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय बलरामपुर में महाशिवरा़ित्र पावन त्यौहार बहुत ही धूम-धाम से मनाया गया। इस कार्यक्रम में बलरामपुर के बहुत सारे भाई- बहने आकर कार्यक्रम का लाभ लिए। महाशिवरात्रि का पर्व वास्तव में अपने अंदर के बुराईयों को त्याग कर दिव्य गुण धारण करने का पर्व है। जब तक व्यक्ति अपने अंदर के बुराईयों को त्याग नहीं करता है तब तक जीवन में सुख-शांति का अनुभव नहीं कर सकते हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि बलरामपुर के पुलिस अधिक्षक भ्राताश्री रामकृष्ण साहू जी ने दीप प्रज्वलित कर के किए।
इसके बाद झण्डा रोहन किया गया और साथ ही सभी को स्वयं की कमी कमजोरियों पर निजात पाने के लिये दृढ़ प्रतिज्ञा करायी गई। 87 वीं शिव जयन्ती को केक कटिंग और कैण्डल लाइटिंग करके मनाया गया।

इस महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में माननिय पुलिस अधिक्षक भा्रता श्री रामकृष्ण साहू जी, वनविभाग के एस0डी0ओ0 भ्राताश्री रविशंकर जी, शासकीय महाविद्यालय के प्राचार्य श्री एन0के0 देवांगन जी, बिहारी पाल जी एवं बलरामपुर संस्था के संचालिका ब्रह्माकुमारी संजू बहन जी तथा संथा से जुड़े बहुत सारे भाई- बहन उपस्थित थे।

शिवरात्रि का ये महान पर्व पूरे संसार के शहर- शहर, गाँव- गांव में सभी परमात्मा शिव के प्रति आगाध प्रेम, श्रद्धा, भावना और धूमधाम से मना रहे हैं उक्त विचार बलरामपुर सेवाकेन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी संजू बहनजी ने अपने दिव्य उद्बोधन में सभी भक्तो के अन्दर भक्ति भावना को जागृत करते हुये कहा। आगे उन्होंने शिवरात्रि के आध्यात्मिक रहस्य को बताते हुए कहे कि शिव के ऊपर बलि चढना अर्थात् अपने मैं पन की, बुराईयों की, विकारों की बलि देना अर्थात विकारों को परमात्मा को समर्पित करना हैं। परमात्मा के साथ हमारे सर्व सम्बन्ध होते हैं और जब वो इस धरा पर आते हैं तब उनसे हमारा सम्बन्ध जुड़ता हैं इसलिये इस पर्व को शिवजयंती, शिवअवतरण, के दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। और उन्होंने शिवरात्रि के शाब्दिक अर्थ को स्पष्ट करते हुये कहा कि जब मनुष्य काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार के वश हो अनैतिकता की ओर चलने लगता हैं जिससे उसका जीवन अंधकार मय हो जाता हैं। ऐसे में परमात्मा अवतरण हमारे जीवन को नैतिकता सीखाकर जीवन सुखमय, शांतिमय बनाकर सतयुगी दुनिया के निर्माण के लिये होता है।

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